दिल का दरिया बह ही गया
इश्क इबादत बन ही गया
खुद को मुझे तू सौंप दे
मेरी ज़रुरत तू बन गया
बात दिल की नज़रों ने की
सच कह रहा तेरी कसम
तेरे बिन अब ना लेंगे एक भी दम
तुझे कितना चाहने लगे हम
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